अतिसाहसमाचरितं विरुध्य गुरुशास्त्राविद्वद्वर्यैः।
त्वयि वृन्दावन! आप वासायेन्द्रियवशमप्यतो न हि त्यज माम्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.14)
हे श्रीवृन्दावन! आप में वास करने के लिए इन्द्रियों के पराधीन होकर मेंने श्रेष्ठ गुरु तथा शास्त्र-वेत्ताओं से विमुख आचरण करके अत्यंत साहस का परिचय दिया है, अतः मुझे त्याग मत देना।
त्वयि वृन्दावन! आप वासायेन्द्रियवशमप्यतो न हि त्यज माम्॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.14)
हे श्रीवृन्दावन! आप में वास करने के लिए इन्द्रियों के पराधीन होकर मेंने श्रेष्ठ गुरु तथा शास्त्र-वेत्ताओं से विमुख आचरण करके अत्यंत साहस का परिचय दिया है, अतः मुझे त्याग मत देना।

