वृन्दावन कौ नाम रट, वृन्दावन कौं देखि।
वृन्दावन सौं प्रीत कर, वृन्दावन उर लेखी॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (79)
श्री वृन्दावन का नाम रट, श्री वृन्दावन का दर्शन कर, उसी वृन्दावन से स्नेह कर और अपने हृदय में श्री वृन्दावन को ही बसा।
वृन्दावन सौं प्रीत कर, वृन्दावन उर लेखी॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (79)
श्री वृन्दावन का नाम रट, श्री वृन्दावन का दर्शन कर, उसी वृन्दावन से स्नेह कर और अपने हृदय में श्री वृन्दावन को ही बसा।

