खान पान तौ कीजिये, रसिक मंडली माहिं।
जिनकै और उपासना, तहाँ उचित ध्रुव नाहिं॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (27)
रसोपासना के भजनी को रसिक-मण्डली में ही खान-पान करना चाहिए। जो लोग अन्य उपासना में लगे हुए हैं, उनके साथ खान-पान करना उचित नहीं माना गया है।
जिनकै और उपासना, तहाँ उचित ध्रुव नाहिं॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, मन शिक्षा लीला (27)
रसोपासना के भजनी को रसिक-मण्डली में ही खान-पान करना चाहिए। जो लोग अन्य उपासना में लगे हुए हैं, उनके साथ खान-पान करना उचित नहीं माना गया है।

