(राग विहाग)
भरोसो दुढ़ इन चरनन केरो। [1]
श्रीवल्लभ नख चन्द्र छटा बिनु सब जगमांझ अँधेरो॥ [2]
साधन और नाहीं या कलिमें जासों होत निवेरो। [3]
'सूर' कहा कहे द्विविध आंधरो बिना मोल को चेरो॥ [4]
- श्री सूरदास जी
श्रीमद् वल्लभ (श्री कृष्ण वा वल्लभाचार्य जी) के चरण कमलों में दृढ़ विश्वास कर इनकी शरण में हो जाओ क्योंकि इन श्रीचरणों के नख चंद्र की छटा के बिना समस्त जग अंधेरा प्रतीत हो रहा है। [1 & 2]
इस कलयुग में कोई दूसरा ऐसा साधन नहीं है जिससे की जीव भव सागर से पार हो जाए। [3]
श्री सूरदास जी कह रहे हैं "मैं तो दोनों प्रकार से अंधा हो गया हूँ (लौकिक एवं पारलौकिक) परंतु इसके पश्चात भी मैं आपका बिना मोल का दास हूँ।" [4]
भरोसो दुढ़ इन चरनन केरो। [1]
श्रीवल्लभ नख चन्द्र छटा बिनु सब जगमांझ अँधेरो॥ [2]
साधन और नाहीं या कलिमें जासों होत निवेरो। [3]
'सूर' कहा कहे द्विविध आंधरो बिना मोल को चेरो॥ [4]
- श्री सूरदास जी
श्रीमद् वल्लभ (श्री कृष्ण वा वल्लभाचार्य जी) के चरण कमलों में दृढ़ विश्वास कर इनकी शरण में हो जाओ क्योंकि इन श्रीचरणों के नख चंद्र की छटा के बिना समस्त जग अंधेरा प्रतीत हो रहा है। [1 & 2]
इस कलयुग में कोई दूसरा ऐसा साधन नहीं है जिससे की जीव भव सागर से पार हो जाए। [3]
श्री सूरदास जी कह रहे हैं "मैं तो दोनों प्रकार से अंधा हो गया हूँ (लौकिक एवं पारलौकिक) परंतु इसके पश्चात भी मैं आपका बिना मोल का दास हूँ।" [4]

