कुंवरी लडैती लाडिली, लाड लडी सुकुमार।
अँग सँग दैनी केली रस, महा प्रेम सुख सार॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (276)
हमारी कुँवरि प्राण-प्यारी श्री राधा महारानी अति सुकुमारी ऐसी लाड़िली हैं, जो महाप्रेम के सुख-सार स्वरूप अंग-संग केलि-रस को ही सदा सर्वदा प्रदान करती रहती हैं।
अँग सँग दैनी केली रस, महा प्रेम सुख सार॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (276)
हमारी कुँवरि प्राण-प्यारी श्री राधा महारानी अति सुकुमारी ऐसी लाड़िली हैं, जो महाप्रेम के सुख-सार स्वरूप अंग-संग केलि-रस को ही सदा सर्वदा प्रदान करती रहती हैं।

