मेरी टेर सुनो सुकुमारी। [1]
अखिल लोक चूड़ामणि सुन्दर मनमोहन की प्यारी॥ [2]
परम उदार दयानिधि नागरि दीनन ओर निहारी। [3]
दासी जानि कीजिये स्वामिनि महल टहल अधिकारी॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, वृन्दावन शतक (53)
श्री लाल बलबीर श्री राधा से प्रार्थना करते हैं: “हे सुकुमारी जू, कृप्या मेरी विनती सुनें, आप श्री कृष्ण की प्रिया हैं जो तीनों लोकों के स्वामी हैं। [1 & 2]
आप सबसे उदार और दयालु हैं, और मैं एक दीन हूँ, कृप्या मेरी ओर भी निहार लीजिए । [3]
श्री लाल बलबीर कहते हैं, कृप्या मुझे अपनी दासी जान अपने महल की टहल प्रदान करें।" [4]
अखिल लोक चूड़ामणि सुन्दर मनमोहन की प्यारी॥ [2]
परम उदार दयानिधि नागरि दीनन ओर निहारी। [3]
दासी जानि कीजिये स्वामिनि महल टहल अधिकारी॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, वृन्दावन शतक (53)
श्री लाल बलबीर श्री राधा से प्रार्थना करते हैं: “हे सुकुमारी जू, कृप्या मेरी विनती सुनें, आप श्री कृष्ण की प्रिया हैं जो तीनों लोकों के स्वामी हैं। [1 & 2]
आप सबसे उदार और दयालु हैं, और मैं एक दीन हूँ, कृप्या मेरी ओर भी निहार लीजिए । [3]
श्री लाल बलबीर कहते हैं, कृप्या मुझे अपनी दासी जान अपने महल की टहल प्रदान करें।" [4]

