मन तोह मिले, विश्राम वही, वृषभान किशोरी के पायन में

मन तोह मिले, विश्राम वही, वृषभान किशोरी के पायन में

मन तोह मिले, विश्राम वही, वृषभान किशोरी के पायन में॥
- श्री प्रेमी जी

जब तुझे ऐसी वृषभानु किशोरी श्री राधारानी जैसी स्वामिनी मिल गयी और उनके चरणों का आश्रय मिल गया तो तू संसार में क्यों भटक रहा है? तुझे उनके चरणों में ही विश्राम मिलेगा और कहीं नहीं।