अहु राधे वृषभानु की, कुँवरी किसोरी बाल।
थोरी बै भौरीहि में, मोहे मोहन लाल॥
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (81)
हे श्री राधे! आपकी जय-जयकार हो। आपने सबके मन को मोहने वाले मोहनलाल श्रीकृष्ण को अपनी किशोरावस्था और भोलेपन से ही मोहित कर लिया है।
थोरी बै भौरीहि में, मोहे मोहन लाल॥
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (81)
हे श्री राधे! आपकी जय-जयकार हो। आपने सबके मन को मोहने वाले मोहनलाल श्रीकृष्ण को अपनी किशोरावस्था और भोलेपन से ही मोहित कर लिया है।

