करहु कृपा अब श्यामा श्याम - श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (290)

करहु कृपा अब श्यामा श्याम - श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (290)

करहु कृपा अब श्यामा श्याम।
करुणा सिंधु लाडिले प्यारे, दीन बन्धु सुख धाम॥ [1]
आरत हरण अधम प्रतिपालक, कृपा मूर्ति अभिराम।
भोरी दुखिया दीन पुकारत,टेरत लै लै नाम॥ [2]

- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (290)

हे श्री श्यामा श्याम, बहुत देर भई, अब मुझ पर अपनी कृपा कीजिये। आप करुणा के सागर हैं और दीन बंधुओं को सुख प्रदान करने वाले हैं। [1]
आप आर्त जनों के दुःख हरण करने वाले हैं, अधम जीवों के प्रतिपालक हैं। आप दोनों कृपा की मूर्ति हैं। श्री भोरी सखी कह रहीं हैं :"मैं आपसे बिछुड़ने के कारण दुखी हूँ, दीन हूँ, और बार-बार आपका नाम लेकर आपको पुकार रही हूँ।" [2]