(राग परज)
राजति नव निकुंज नव जोरी। [1]
सुंदर स्याम रसीले अंग अंग नवल कुंवर तन गोरी॥ [2]
वदन माधुरी मदन सदन सुख सागर नागरि कुंवरि किसोरी। [3]
सरसदेव नैंननि सचुपावत कौतिक निपट नयोरी॥ [4]
- श्री सरसदेव जी, श्री सरस देव जू की बानी (29)
नवल निकुंज में नवल जोरी श्री जुगल किशोर विराज रहे हैं। [1]
श्री श्यामसुंदर के अंग-प्रत्यंग रस से भरे प्रतीत हो रहे हैं एवं नवल किशोरी श्री श्यामा जू की अंग कांति विद्युत वर्ण है। [2]
श्री श्यामसुंदर की वदन माधुरी मूर्तिमान प्रेम स्वरूप है एवं नवल नागरि श्री कुंवरी किशोरी जू सुख की सागर हैं। [3]
श्री सरसदेव जी कह रहे हैं की “नवल निकुंज में श्री जुगल किशोर की नई-नई लीलाओं को देख मेरी आंखे सुख का अनुभव कर रहीं हैं।” [4]
राजति नव निकुंज नव जोरी। [1]
सुंदर स्याम रसीले अंग अंग नवल कुंवर तन गोरी॥ [2]
वदन माधुरी मदन सदन सुख सागर नागरि कुंवरि किसोरी। [3]
सरसदेव नैंननि सचुपावत कौतिक निपट नयोरी॥ [4]
- श्री सरसदेव जी, श्री सरस देव जू की बानी (29)
नवल निकुंज में नवल जोरी श्री जुगल किशोर विराज रहे हैं। [1]
श्री श्यामसुंदर के अंग-प्रत्यंग रस से भरे प्रतीत हो रहे हैं एवं नवल किशोरी श्री श्यामा जू की अंग कांति विद्युत वर्ण है। [2]
श्री श्यामसुंदर की वदन माधुरी मूर्तिमान प्रेम स्वरूप है एवं नवल नागरि श्री कुंवरी किशोरी जू सुख की सागर हैं। [3]
श्री सरसदेव जी कह रहे हैं की “नवल निकुंज में श्री जुगल किशोर की नई-नई लीलाओं को देख मेरी आंखे सुख का अनुभव कर रहीं हैं।” [4]

