वृन्दाविपिन प्रणाम करि - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (80)

वृन्दाविपिन प्रणाम करि - श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (80)

वृन्दाविपिन प्रणाम करि, वृन्दावन सुख खान।
जो चाहत विश्राम ध्रुव, वृन्दावन पहिचान॥

- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (80)

 श्री ध्रुवदास जी कहते हैं—समस्त सुखों की खान श्री वृन्दावन की शरण ग्रहण करो और उसी की वंदना करो। जब श्री वृन्दावन को पहचानोगे, तभी वास्तविक विश्राम प्राप्त होगा।