प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (8)

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (8)

प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी,
जय हो जय हो जय हो बरसाने वारी प्यारी। [1]
आगे आगे प्यारी चले पाछे ब्रजनारी,
ब्रजनारी पाछे पाछे चले बनवारी। [2]
जब जब निकसत प्यारी की सवारी,
भुजन उठाय बोले पीय जय हो प्यारी। [3]
प्यारी को बुलाओ रो के भाजी आवें प्यारी,
बिनुहिं बुलाये भाजे आवें बनवारी। [4]
ब्रजरस चुवे रोम रोप तनु प्यारी,
पियें ब्रजनारी ललचायें बनवारी। [5]
कोउ जाने कैसे हैं कृपालु बनवारी,
पिय को 'कृपालु' बनाने वारी प्यारी॥ [6]

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (8)

वृषभानु दुलारी श्री प्रिया जू, जो भोरी हैं, प्यारी हैं, बरसाने वाली हैं, उनकी जय हो, जय हो, जय हो। [1]
श्री प्यारी जू आगे-आगे चल रहीं हैं, पीछे सखियाँ चल रहीं हैं और सखियों के पीछे ब्रजेंद्र नन्दन श्री कृष्ण चल रहे हैं। [2]
जब-जब श्री प्रिया जू की सवारी निकलती है तब तब यह देख श्री श्यामसुन्दर अपनी भुजाओं को उठा कर श्री प्रिया जू की जय-जयकार करते हैं। [3]
श्री राधा रानी को यदि कोई रो कर पुकारता है तो श्री राधा रानी उसके पास दौड़ी चली आती हैं और उनके पीछे श्री कृष्ण भी बिना बुलाए ही दौड़े चले आते हैं। [4]
श्री प्यारी जू के रोम रोम से ब्रज रस टपक रहा है जिसका सखियाँ पान कर रही हैं और श्री कृष्ण देख-देख ललचा रहे हैं। [5]
यदि किसी को यह जानना है कि श्री कृष्ण इतने कृपालु क्यों हैं तो उसका उत्तर देते हुए श्री कृपालु जी कह रहे हैं की “श्री कृष्ण को कृपालु बनाने वाली श्री राधारानी ही हैं।” [6]