सन्तन की यह साधन भूमि है - श्री नन्दन जी

सन्तन की यह साधन भूमि है - श्री नन्दन जी

(सवैया)
सन्तन की यह साधन भूमि है, भक्तन की ये आनन्दिनी प्यारी। [1]
सिद्धि की ये प्रसिद्ध धरा, अरु प्रेमिन प्रेम पगी सुखकारी॥ [2]
नन्दन जु गुनि ग्यानिन को ये, मान बढ़ावत है नित भारी। [3]
रास विलास हुलास भरी यहाँ, रास रचैं नित रास बिहारी॥ [4]

- श्री नन्दन जी

ब्रज धाम की यह पावन भूमि संतों की साधना-स्थली और भक्तों को परम आनंद प्रदान करने वाली प्रिय भूमि है। [1]

यह सिद्धियों को देने वाली सुप्रसिद्ध धरा है तथा प्रेमियों के लिए अति सुखदायिनी और प्रेम-रस में पगी हुई है। [2]

कवि 'नन्दन' कहते हैं कि यह भूमि ज्ञानियों और गुणियों के गौरव व मान को नित्यप्रति अत्यंत बढ़ाती है। [3]

उल्लास से परिपूर्ण इस धाम में रास-बिहारी श्री श्यामसुंदर नित्य-निरंतर अपने रसमय रास-विलास की रचना करते हैं। [4]