उचित नहीं कहनी इती, रहस केली रस काम - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (103)

उचित नहीं कहनी इती, रहस केली रस काम - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (103)

उचित नहीं कहनी इती, रहस केली रस काम।
“नागरिया” कौ दोस कहा, प्रेरक श्यामा श्याम॥

- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (103)

यद्यपि यह प्रिया-प्रियतम के अद्भुत केलि-रस का वर्णन करना उचित नहीं है क्योंकि यह एक गोपनीय रहस्य है; परंतु इसमें मेरा दोष ही कहाँ है? क्योंकि इसके प्रेरक तो स्वयं श्यामा-श्याम ही हैं।