ताको संग न छाँड़हीं, नैकु सरन गहे आनी

ताको संग न छाँड़हीं, नैकु सरन गहे आनी

ताको संग न छाँड़हीं, नैकु सरन गहे आनी
- श्री ध्रुव दास, बयालीस लीला

श्री राधा इतनी दयालु हैं कि वह उस जीव का संग एक क्षण के लिए भी नहीं छोड़ती जो उनकी शरण में एक बार चला जाता है ।