"कृष्णादप्यधिकं प्रेम राधिकायां प्रकुर्वतीम्"
(पद्म पुराण - खण्डः 5, अध्यायः 83, पद 09)
जीव का श्री राधा में श्री कृष्ण से भी अधिक प्रेम होना चाहिए।
(पद्म पुराण - खण्डः 5, अध्यायः 83, पद 09)
जीव का श्री राधा में श्री कृष्ण से भी अधिक प्रेम होना चाहिए।

