युगल रूप कैसे चितलावौं - श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर

युगल रूप कैसे चितलावौं - श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर

युगल रूप कैसे चितलावौं। [1]
लीला ललित बैठि अनुमानत, नित-नित जुगति लड़ावौं।। [2]
ऐसी कृपा करौ अलबेली, छिन इक झाँकी पावौं। [3]
भोरी श्याम-गौर नव जोरी, हृदय निकुञ्ज बसावौं।। [4]

- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (295)

भावार्थ:
श्री भोरी सखी जी, किशोरी जी से कह रही हैं कि कैसे युगल रूप मेरे चित्त में आए? [1]
ललित कुंजों में जो प्रियतम आपको नित नित लाड़ लड़ा रहे है उस लीला का दर्शन कैसे करूं? [2]
किशोरी जी आप ऐसी कृपा करो जिससे एक क्षण ही सही आपकी दिव्य झाँकी चित्त में आ जाये जिससे मैं आपके नित्य प्रेम में डूबी रहूं। [3]
श्री भोरी सखी जी कह रही हैं कि आपकी (प्रिया प्रियतम) जो नित नवीन जोड़ी है उसे आप मेरे हृदय निकुंज में बसाइए। [4]