विद्या पढ़ करतौ फिरै - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (59)

विद्या पढ़ करतौ फिरै - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (59)

विद्या पढ़ करतौ फिरै, औरन को अपमान।
नारायण विद्या नहीं, ताहि अविद्या जान॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (59)

विद्या प्राप्त करने के बाद भी यदि हम दूसरों का अपमान करते हैं, तो उसे विद्या नहीं, बल्कि अज्ञान कहा जाता है।