वृन्दावन कलानाथौ हृदयानन्द वर्द्धनौ।
सुखदौ राधिका कृष्णौ भजेsहं कुञ्ज गामिनौ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, सहज सुख, मंगलाचरण
मैं नित्य निकुञ्ज लीला परायण उन श्रीराधा कृष्ण को भजता हूँ जो वृन्दावन के चन्द्रमा स्वरूप हैं, जिनके हृदयों का स्वभाविक आनन्द उल्लास इस प्रकार से बढ़ता रहता है जैसे चन्द्रमा को देखकर समुद्र में बाढ़ आती रहती है। इसी आनन्द बाढ़ से स्वयं आपको और आपके परिकरों को सुख मिलता रहता है।
सुखदौ राधिका कृष्णौ भजेsहं कुञ्ज गामिनौ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, सहज सुख, मंगलाचरण
मैं नित्य निकुञ्ज लीला परायण उन श्रीराधा कृष्ण को भजता हूँ जो वृन्दावन के चन्द्रमा स्वरूप हैं, जिनके हृदयों का स्वभाविक आनन्द उल्लास इस प्रकार से बढ़ता रहता है जैसे चन्द्रमा को देखकर समुद्र में बाढ़ आती रहती है। इसी आनन्द बाढ़ से स्वयं आपको और आपके परिकरों को सुख मिलता रहता है।

