आवयोर्भेदबुद्धिम् वै य: करोति नराधम: (ब्रह्म वैवर्त पुराण)

आवयोर्भेदबुद्धिम् वै य: करोति नराधम: (ब्रह्म वैवर्त पुराण)

आवयोर्भेदबुद्धिम् वै य: करोति नराधम: ।
तस्य वास: कालसूत्रे यावच्चन्द्रदिवाकरौ ।

(ब्रह्म वैवर्त पुराण)

मुझमें (श्री कृष्ण में) और तुम में (श्री राधा में) जो अधम मानुष भेद मानता है (एवं दुर्भावना रखकर), वह जबतक चंद्रमा और सूर्य रहेंगे, तब तक ‘कालसूत्र’ नामक नरक में रहेगा।