बिहार है आगार रस को - श्री पीताम्बर देव जी, श्री पीताम्बर देव जू की वाणी

बिहार है आगार रस को - श्री पीताम्बर देव जी, श्री पीताम्बर देव जू की वाणी

बिहार है आगार रस को, रसिक अनुग्रह सों लहै।
नाहि साधन आन कोऊ, बिना समझे को कहै॥

- श्री पीताम्बर देव जी, श्री पीताम्बर देव जू की वाणी

श्री पीताम्बर देव जी वर्णन करते हैं कि रसिकों के अनुग्रह (कृपा) से ही सागररूप (आगार—जिसका आदि और अंत नहीं है) नित्य-विहार-रस की प्राप्ति होती है। किसी साधना या उपासना मात्र से इस रस को समझा नहीं जा सकता, और न ही इस रस की प्राप्ति किए बिना कोई इसके विषय में कुछ कह सकता है।