राधा राधा रटत हैं आक ढ़ाक अरू खैर - श्री तुलसीदास जी महाराज

राधा राधा रटत हैं आक ढ़ाक अरू खैर - श्री तुलसीदास जी महाराज

राधा राधा रटत हैं आक ढ़ाक अरू खैर।
- श्री तुलसीदास जी महाराज

जब श्री तुलसीदास जी महाराज वृन्दावन आये और उन्होंने यहाँ की दिव्यता को देखा, तब वह बोले , यहाँ के तो पत्ते, वृक्ष एवं पौधे तक केवल ‘राधा राधा’ ही रटते हैं।