जय मंजुल कुंज निकुंजन की - ब्रज के सवैया

जय मंजुल कुंज निकुंजन की - ब्रज के सवैया

जय मंजुल कुंज निकुंजन की, रस पुंज विचित्र समाज की जै जै।
यमुना तट की वंशीवट की, गिरजेश्वर की गिरिराज की जै जै॥ [1]
ब्रज गोपिन गोप कुमारन की, विपनेश्वर के सुख साज की जै जै।
ब्रज के सब सन्तन भक्तन की, ब्रज मंडल की ब्रजराज की जै जै॥ [2]

- ब्रज के सवैया

ब्रज के शीतल कुंजों एवं निकुंजों की जै हो। कुंज में रास-विलास करने वाले रसिकों के समाज की जै हो। यमुना तट, वंशीवट की, गिरिराज के ईश्वर की और गिरिराज महाराज की जै हो। [1]

ब्रज की गोपियों की, गोप-ग्वालों की, वृंदावनेश्वर की और उनकी आनंदमयी लीलाओं की जै हो। ब्रज के समस्त संतों और भक्तों की जै हो। ब्रज मंडल की जै हो और ब्रज-चूड़ामणि श्री राधा-कृष्ण की जै हो। [2]