हमारी नित्य लडैती प्यारी - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (64)

हमारी नित्य लडैती प्यारी - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (64)

हमारी नित्य लडैती प्यारी । [1]
जाकी प्रीति नई नई छिन्न छिन्न रोम रोम हितकारी।। [2]
अद्भुत रूप रंग कौ सागर जीवनि प्राण अधारी। [3]
श्री हरिदासी ललित किसोरी कबहूँ होति न न्यारी।। [4]

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (64)

हमारी नित्य किशोरी श्री राधा ऐसी स्वामिनी अलबेली सरकार हैं जो प्रत्येक क्षण नव प्रीति रस हमें प्रदान करती हैं । इनके जैसा हितकारी कौन होगा? (यह अलबेली सरकार ऐसी है जो रोम रोम से हितकारी हैं अर्थात् यह दूसरे का हित ही करना जानती हैं और कुछ इन्हें आता ही नहीं है) । [1 & 2]
श्री राधा ही केवल ऐसी हैं जो अद्भुत रूप और रंग का अनंत सागर हैं, यह हमें प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं और मानो हमारे जीवन का प्राण हैं । [3]
श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि श्री जी हमसे एक क्षण के लिए भी विलग नहीं होती, और न हम इनसे अलग होते हैं । [4]