जद्यपि अधम मलीन हौं, तदपि तिहारी आस।
सदा कृपा करि दीजै, श्रीवनराज निवास॥
- श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (12)
सदा कृपा करि दीजै, श्रीवनराज निवास॥
- श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (12)
हे राधे! यद्यपि मैं एक अधम और मलीन जीवात्मा हूँ, तथापि मेरी आशा एकमात्र आप ही से है। ऐसी कृपा कीजिए कि मुझे श्रीवृन्दावन धाम में निरंतर वास प्राप्त हो।

