कुञ्ज महल में पौड़े दोउ - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (819)

कुञ्ज महल में पौड़े दोउ - श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (819)

(राग केदारौ)
कुञ्ज महल में पौड़े दोउ। [1]
नन्द नंदनंदन वृषभानु नंदिनी उपमा कौं दूजौ नहिं कोऊ।। [2]
नाना कुसुम की सेज रची है, कोक कला जानत हैं सोऊ। [3]
रसिक मुकुट मणि रंग में भीनें "परमानन्द" तहाँ द्वारें होउ।। [4]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (819)

श्री राधा कृष्ण सुंदर कुंज महल में सुशोभित हैं। [1]
श्री राधा कृष्ण की इस अद्भुत उपमा का वर्णन किसी और से करना असंभव है । [2]
विभिन्न प्रकार के फूलों से सेज को सजाया गया है और वे ललित कोक-कलाओं में निपुण हैं । [3]
रसिक मुकुट मणि श्री राधा कृष्ण प्रेम के रंगों में भीने हुए हैं, श्री परमानंद दास जी कह रहे हैं उस अलौकिक द्वार पर (लीला में) अपने मन को ले जाओ। [4]