(राग विहाग)
पिय प्यारी के चरण पलोटत। [1]
ललितादिक बिजना ले आईं ताही देखके घूँघट ओटत।। [2]
चन्दन लेप करत दोऊ अंगन आलिंगन अधरन रस घोटत। [3]
नन्ददास श्याम श्यामा दोऊ पोढ़े नवनिकुंज कालिन्दी के तट।। [4]
- श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली
श्री कृष्ण श्री राधा के चरण दबा रहे हैं, श्री ललिता एवं अन्य सखी पंखा झलने के लिए आती हैं तब श्री राधा घूँघट ओढ़ लेती हैं । [1 & 2]
श्री राधा कृष्ण एक दूसरे के अंगों में चंदन का लेप लगते हैं, आलिंगन करते हैं एवं अधर रस का पान करते हैं । [3]
इस तरह श्री नंद दास कहते हैं कि श्री श्यामा श्याम वृंदावन नव निकुंज में कालिन्दी के तट पर विहार करते हैं। [4]
पिय प्यारी के चरण पलोटत। [1]
ललितादिक बिजना ले आईं ताही देखके घूँघट ओटत।। [2]
चन्दन लेप करत दोऊ अंगन आलिंगन अधरन रस घोटत। [3]
नन्ददास श्याम श्यामा दोऊ पोढ़े नवनिकुंज कालिन्दी के तट।। [4]
- श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली
श्री कृष्ण श्री राधा के चरण दबा रहे हैं, श्री ललिता एवं अन्य सखी पंखा झलने के लिए आती हैं तब श्री राधा घूँघट ओढ़ लेती हैं । [1 & 2]
श्री राधा कृष्ण एक दूसरे के अंगों में चंदन का लेप लगते हैं, आलिंगन करते हैं एवं अधर रस का पान करते हैं । [3]
इस तरह श्री नंद दास कहते हैं कि श्री श्यामा श्याम वृंदावन नव निकुंज में कालिन्दी के तट पर विहार करते हैं। [4]

