“ टेढ़े रहें सदा मोहन रसिया सों, बोलत अटपटी वाणी |
सदा रहे अलमस्त निकुंज में, सर पे हमारे श्री राधा महारानी ||
हम श्री राधा महारानी जू के बल अभिमानी ||”
- श्री किशोरी अली
श्री किशोरी अली कहते हैं कि हम मोहन लाल रसिया से भी हमेशा टेड़े रहते हैं, और उनको भी अटपटी वाणी सुनाने में नहीं चूकते | हमारा मन सदा अलमस्त निकुंज में रहता है क्यूंकि हमारे सर पर श्री राधारानी नित्य रहती हैं | हम श्री राधा महारानी जू के अनन्य भक्त हैं और उन्ही के बल से अभिमानी हैं और ऐसा करने में सक्षम हैं |
सदा रहे अलमस्त निकुंज में, सर पे हमारे श्री राधा महारानी ||
हम श्री राधा महारानी जू के बल अभिमानी ||”
- श्री किशोरी अली
श्री किशोरी अली कहते हैं कि हम मोहन लाल रसिया से भी हमेशा टेड़े रहते हैं, और उनको भी अटपटी वाणी सुनाने में नहीं चूकते | हमारा मन सदा अलमस्त निकुंज में रहता है क्यूंकि हमारे सर पर श्री राधारानी नित्य रहती हैं | हम श्री राधा महारानी जू के अनन्य भक्त हैं और उन्ही के बल से अभिमानी हैं और ऐसा करने में सक्षम हैं |

