मन मेरे मीत जोपै कह्यो माने मेरो तौं - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, हरि पद संग्रह (50)

मन मेरे मीत जोपै कह्यो माने मेरो तौं - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, हरि पद संग्रह (50)

“मन मेरे मीत जोपै कह्यो माने मेरो तौं,
राधा पद कंज कौ भ्रमर है के रहिरे ॥”

- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, हरि पद संग्रह (50)

  -  श्री हठी जी कहते हैं, हे प्रिय मन, मेरे प्रिय मित्र, अगर तुम मेरी बात मानो तो मैं तुमसे यही कहता हूँ कि श्री किशोरी जु के चरण कमल के मधुर रस पर भंवर की भांति नित्य मंडराते रहो ।