बन है बाग सुहाग कौ, राख्यौ रस में पागि।
रूप-रंग के फूल दोउ, प्रीति लता रहे लागि॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (30)
परम सौभाग्य स्वरूप इस परम रसमय श्रीवृन्दावन की माधुरी ने प्रीति-लता पर लगे रूप और रंग के दो पुष्पों (श्री श्यामा-श्याम) को भी रस-मत्त कर रखा है।
रूप-रंग के फूल दोउ, प्रीति लता रहे लागि॥
- श्री ध्रुवदास जी, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (30)
परम सौभाग्य स्वरूप इस परम रसमय श्रीवृन्दावन की माधुरी ने प्रीति-लता पर लगे रूप और रंग के दो पुष्पों (श्री श्यामा-श्याम) को भी रस-मत्त कर रखा है।

