सुरतरु, नागरी, नेह निधान, स्यामा सरन मैं तेरी

सुरतरु, नागरी, नेह निधान, स्यामा सरन मैं तेरी

सुरतरु, नागरी, नेह निधान, स्यामा सरन मैं तेरी
- श्री भगवत रसिक
भगवत रसिक जी कहते हैं कि हे लाड़ली जी आप ही केवल रसिकों के लिए कल्पलता हैं, चतुर शिरोमणि हैं, और प्रेम की निधि हैं।