“हम चाकर राधा रानी के।
निरभय रहत वदत नहिं काहू डर नहिं डरत भवानी के।”
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, होली (11)
हम श्री राधारानी की नित्य दासी हैं । इस प्रकार मैं हमेशा निर्भय रहता हूँ और मुझे किसी भी देवी देवता या ग्रहों का भय नहीं है। यहाँ तक कि मुझे भयानक देवी का भी भय नहीं है ।
निरभय रहत वदत नहिं काहू डर नहिं डरत भवानी के।”
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, होली (11)
हम श्री राधारानी की नित्य दासी हैं । इस प्रकार मैं हमेशा निर्भय रहता हूँ और मुझे किसी भी देवी देवता या ग्रहों का भय नहीं है। यहाँ तक कि मुझे भयानक देवी का भी भय नहीं है ।

