जग में सबते अधिक अति, ममता तनहिं लखाई।
पै या तनहूँ ते अधिक, प्यारों प्रेम कहाई॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (27)
पै या तनहूँ ते अधिक, प्यारों प्रेम कहाई॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (27)
संसार में लोगों को सबसे अधिक ममता अपने शरीर से होती है; परन्तु यदि अपने तन से भी अधिक ममता प्रेमास्पद में हो, तो वही सच्चा प्रेम है।

