"और आश्चर्य मैं कहूँ न देख्यो, सुन्यो चतुर चौंसठ कला तदपि भोरी"
- श्री गदाधर भट्ट
इससे बड़ा आश्चर्य मैंने कहीं नहीं देखा कि श्री राधे, आप चौंसठ कला में चतुर होते हुए भी अत्यंत भोरी हो। केवल आप ही अलबेली सरकार हो, आप जैसा तो कोई भी नहीं है ।
- श्री गदाधर भट्ट
इससे बड़ा आश्चर्य मैंने कहीं नहीं देखा कि श्री राधे, आप चौंसठ कला में चतुर होते हुए भी अत्यंत भोरी हो। केवल आप ही अलबेली सरकार हो, आप जैसा तो कोई भी नहीं है ।

