हमारी अब सब बनी भली हैं। [1]
कुंजमहल की टहल दई मोहि जहाँ नीति रंग रली हैं ।। [2]
साहिब श्यामा श्याम उसीली ललिता ललित अली हैं। [3]
नागरिया पैं कृपा करी अति श्री वृषभान लली हैं।। [4]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (86)
हमारी अब सब बात बन गयी है। [1]
हमें अब कुंज महल की नित्य ही टहल मिल गयी है जहां नित्य ही नई नई रंगरली मनायी जाती है । [2]
हमारे साहिब एक मात्र युगल सरकार श्यामा श्याम हैं एवं हमें नित्य उन्मत्त ललिता इत्यादि सखियों का संग हैं । [3]
श्री नागरी दास कहते हैं कि मैं तो इतना जानता हूँ कि हमारे ऊपर तो श्री राधा रानी ने अत्यंत कृपा करी है (ऐसी कृपा जिसे बताना असम्भव हो) । [4]
कुंजमहल की टहल दई मोहि जहाँ नीति रंग रली हैं ।। [2]
साहिब श्यामा श्याम उसीली ललिता ललित अली हैं। [3]
नागरिया पैं कृपा करी अति श्री वृषभान लली हैं।। [4]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (86)
हमारी अब सब बात बन गयी है। [1]
हमें अब कुंज महल की नित्य ही टहल मिल गयी है जहां नित्य ही नई नई रंगरली मनायी जाती है । [2]
हमारे साहिब एक मात्र युगल सरकार श्यामा श्याम हैं एवं हमें नित्य उन्मत्त ललिता इत्यादि सखियों का संग हैं । [3]
श्री नागरी दास कहते हैं कि मैं तो इतना जानता हूँ कि हमारे ऊपर तो श्री राधा रानी ने अत्यंत कृपा करी है (ऐसी कृपा जिसे बताना असम्भव हो) । [4]

