अनंत जनम की भूलि कौं, छिन में डारैं खोई।
श्री कुंज बिहारिनि लाडिली, तुम ते सब कछु होई॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (150)
हे श्री राधा! सर्वसमर्थ प्राणप्यारी जू, आप ऐसी कृपामयी स्वामिनी हैं कि अनंत जन्मों की भूल को भी एक क्षण में मिटा देती हैं। मुझमें कोई साधन-बल नहीं है; आप ही मेरी प्रतिपालक हैं। जो कुछ होगा, वह आपकी कृपा से ही होगा।
श्री कुंज बिहारिनि लाडिली, तुम ते सब कछु होई॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (150)
हे श्री राधा! सर्वसमर्थ प्राणप्यारी जू, आप ऐसी कृपामयी स्वामिनी हैं कि अनंत जन्मों की भूल को भी एक क्षण में मिटा देती हैं। मुझमें कोई साधन-बल नहीं है; आप ही मेरी प्रतिपालक हैं। जो कुछ होगा, वह आपकी कृपा से ही होगा।

