अलिन्दे कालिन्दनी- तट नवलता-मन्दिरवरे
रतामर्दोंद्भुतश्रमजल- भरापूर्णवपुषो:।
सुखस्पर्शेनामीलितनयनयो : शीतमतुलं ,
कदा कुर्य्या सम्बीजनमहह राधा-मुरभिदो : ।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (165)
अहा ! कालिन्दी कुल वर्ती नव-लता-मन्दिर-गत-प्राङ्गण में रति-केलि-मर्दन से उद्भूत (प्रकट हुए) श्रम-जल-प्रवाह से परिपूरित शरीर और सुख-स्पर्श से आमिलित ( मूँदे हुए ) नयन श्रीराधा-मधुसूवन को में कब अतुल शीतल सम्वीजन (द्वारा) बयार करूँगी ?
रतामर्दोंद्भुतश्रमजल- भरापूर्णवपुषो:।
सुखस्पर्शेनामीलितनयनयो : शीतमतुलं ,
कदा कुर्य्या सम्बीजनमहह राधा-मुरभिदो : ।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (165)
अहा ! कालिन्दी कुल वर्ती नव-लता-मन्दिर-गत-प्राङ्गण में रति-केलि-मर्दन से उद्भूत (प्रकट हुए) श्रम-जल-प्रवाह से परिपूरित शरीर और सुख-स्पर्श से आमिलित ( मूँदे हुए ) नयन श्रीराधा-मधुसूवन को में कब अतुल शीतल सम्वीजन (द्वारा) बयार करूँगी ?

