भवतीनां प्रियसङ्गम संजात - श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (5)

भवतीनां प्रियसङ्गम संजात - श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (5)

भवतीनां प्रियसङ्गम संजात मनो महोत्सवेक्षणतः।
तर्पण मिह सर्वेन्द्रियतृप्ति भावितान्मनोरथाप्त्यामे ॥

- श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (5)

हे राधे, ऐसा कब होगा जब आपको अपने प्रियतम श्याम सुंदर से मिलने पर जो अपार आनंद प्राप्त होता है जिसमें प्रत्येक क्षण नित्य नव रस उत्सव होता है, उसको देखकर मेरी समस्त इंद्रियाँ तृप्त हो जाएँगी ।