बल्लभ संग निकुजन में - श्री नंदन जी

बल्लभ संग निकुजन में - श्री नंदन जी

बल्लभ संग निकुजन में, नित रासविलास सिंगार हैं राधे। [1]
माननी मान गुमान करै, तब मोहन की मनुहार हैं राधे॥ [2]
अष्ट सखीन सु मण्डल में, सब गोपिन की सरदार हैं राधे। [3]
रास रसेश्वर संग नचे, तब लागत नेहिल सार हैं राधे ॥ [4]

- श्री नंदन जी

श्री राधा श्री कृष्ण संग रास विलास करती हैं, तो निकुंज की श्रृंगार प्रतीत होती हैं । [1]
जब श्री राधा माननी स्वरूप धारण कर श्री कृष्ण से मान करती हैं तब श्री कृष्ण जिनकी चाटुकारिता करती हैं वही श्री राधे हैं । [2]
अष्ट सखियों के मंडल में, सब गोपीयों की सरदार हैं श्री राधे । [3]
जब रास रासेश्वर श्री कृष्ण संग श्री राधारानी नाचती हैं तब श्री राधा रानी प्रेम की सार प्रतीत होती हैं। [4]