दूरे चैतन्यचरणाः कलिराविरभून्महान् - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.29)

दूरे चैतन्यचरणाः कलिराविरभून्महान् - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.29)

दूरे चैतन्यचरणाः कलिराविरभून्महान्।
कृष्णप्रेमा कथं प्राप्यो बिना वृन्दावने रतिम।।

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.29)

श्रीकृष्णचैतन्य महाप्रभु के चरण तो दूर हैं (उनकी प्राप्ति मेंरे लिये कठिन है) महा कलियुग आ गया!! इसलिये श्रीवृन्दावन की रति के बिना श्रीकृष्ण-प्रेम कैसे प्राप्त होगा?