प्रेम नगर ब्रज भूमि है जहां न जावै कोय - ब्रज के दोहे

प्रेम नगर ब्रज भूमि है जहां न जावै कोय - ब्रज के दोहे

प्रेम नगर ब्रज भूमि है, जहां न जावै कोय।
जावै तो जीवै नहीं, जीवै तो बौरा होय॥

- ब्रज के दोहे

यह पावन ब्रज भूमि साक्षात् प्रेम का नगर है। जो भी इसकी सीमा में प्रवेश करता है, वह संसार के सभी बंधनों को खो देता है। यदि वह लौटता भी है, तो वह प्रभु के दिव्य प्रेम में पूर्णतः मदमस्त (बावरा) हो जाता है।