जोरी अद्भुत आज बनी - स्वामी श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, रस के पद (123)

जोरी अद्भुत आज बनी - स्वामी श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, रस के पद (123)

(राग केदारौ)
जोरी अद्भुत आज बनी। [1]
बारौं कोटि काम नख छबि पर उज्ज्वल उपमा नील मनी।।[2]
उपमा देत सकुचि निरउपमित घन दामिनि लजनी। [3]
करत हास परिहास प्रेम जुत सरस विलास सनी।।[4]
कहा री कहौं लावण्य रूप गुन सोभा सहज घनी। [5]
श्रीबिहारिनदास दुलरावत श्री हरिदास कृपा बरनी।।[6]

- स्वामी श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, रस के पद (123)

अहा! आज श्री श्यामा स्याम की अद्भुत जोरी बनी है जिनकी नख की उज्जवल कांति (मानो नील मणि समान है) पर अनंत कोटि कामदेव को भी वारा जा सकता है । [1 & 2]
ऐसा अद्भुत सौंदर्य है जिसे देखकर घन दामिनी इत्यादि सभी सकुचा गए हैं । [3]
जब यह अनुपम जोरी प्रेम युक्त हास परिहास परायण होती है तब सरस रस का विस्तार करती है । [4]
ऐसी जोरी के विषय में क्या और कहाँ तक ही कहा जाए? मानो साक्षात लावण्य, रूप, गुन की घनीभूत शोभा सहज प्रकट हो गयी है। [5]
श्री बिहारिन देव जी कहते हैं कि इस अद्वितीय जोरी को दुलार एवं वर्णन करना असम्भव है, परंतु वह अगर कर रहे हैं तो एक मात्र श्री स्वामी हरिदास (लालिता अवतार) जी की कृपा से ही कर रहे हैं। [6]