कुंज बिहारिनि लाडिली - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (280)

कुंज बिहारिनि लाडिली - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (280)

कुंज बिहारिनि लाडिली, छिन छिन पोषत भाऊ।
लिएँ सुभाव सदा रहै, रसिक सिरोमनि राउ॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (280)

रसिक-शिरोमणि की भी सिरमौर हमारी श्री कुंजबिहारिनि लाड़िली, अपने निज जनों के स्वभाव को जानकर क्षण-क्षण उनके भावों का पोषण करती रहती हैं।