हित हरिवंश अनत सचु नाहीं बिनु या रजहिं लिये

हित हरिवंश अनत सचु नाहीं बिनु या रजहिं लिये

हित हरिवंश अनत सचु नाहीं बिनु या रजहिं लिये
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (20)

श्री हित हरिवंश महाप्रभु कहते हैं कि वृन्दावन की रज प्राप्ति किये बिना अन्यत्र हर जगह अशांति ही मिलेगी।