यह ‘कृपालु’ की चाह रैन दिन, चरनन ध्यान लगाऊँ

यह ‘कृपालु’ की चाह रैन दिन, चरनन ध्यान लगाऊँ

यह ‘कृपालु’ की चाह रैन दिन, चरनन ध्यान लगाऊँ ||
किशोरी तोरे, चरनन की बलि जाऊँ ||

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि मेरी यही अभिलाषा है कि मैं दिन – रात इन्हीं चरणों का ध्यान किया करूँ । हे किशोरी जी ! मैं तुम्हारे चरणों की बलैया लेता हूँ ।