महामोहिनी कोटि दुर्मोह दृष्टिर्महा सिद्धि कोटिषु दुर्गन्ध बुद्धिः।
हृदिव्यक्तराधापदाम्भोजशोभः कदालोभयिष्यामिवृन्दावनेऽन्यान्।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (14.89)
कोटि कोटि महामोहिनी स्त्रियों को भी दुर्मोह दृष्टि से देखता हुआ, कोटि महासिद्धियों में भी दुर्गंध बुद्धि करता हुआ और हृदय में श्रीराधा चरणकमलों की शोभा स्मरण करके अन्य सब त्याग कर मैं कब श्रीवृन्दावन वास के प्रति लालसान्वित होऊंगा ?
हृदिव्यक्तराधापदाम्भोजशोभः कदालोभयिष्यामिवृन्दावनेऽन्यान्।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (14.89)
कोटि कोटि महामोहिनी स्त्रियों को भी दुर्मोह दृष्टि से देखता हुआ, कोटि महासिद्धियों में भी दुर्गंध बुद्धि करता हुआ और हृदय में श्रीराधा चरणकमलों की शोभा स्मरण करके अन्य सब त्याग कर मैं कब श्रीवृन्दावन वास के प्रति लालसान्वित होऊंगा ?

