उद्धव क्यारी, नंदगाँव

उद्धव क्यारी, नंदगाँव

निराकार ईश्वर बनाम साकार ईश्वर के बारे में श्रीमद्भागवत में उल्लेखित प्रसिद्ध उद्धव-गोपी संवाद को स्मरण करने वालों के हृदयों में इस स्थली का एक विशेष स्थान है। कृष्ण के मित्र उद्धव को ज्ञान-आधारित आध्यात्मिक मार्ग पर गहरा विश्वास था। भक्ति के महत्व को सिखाने के लिए कृष्ण ने उन्हें मथुरा में अपने महल से गोपियों के दूत के रूप में भेजा, एवं संदेश दिया कि वे कृष्ण को भूल जाएं और ब्रह्म यानी परमात्मा का ध्यान करें। उधव ने इसे एक तुच्छ काम समझा, अपने ज्ञान के अहंकार के साथ ब्रज में आए। इस वन में वह श्री राधा और अन्य गोपियों से मिले थे। यहीं पर उनके और गोपियों के बीच प्रसिद्ध ऐतिहासिक बहस हुई। उन्हें ज्ञान मार्ग में बदलने का उनका प्रयास पूरी तरह विफल रहा। गोपियों ने व्यंग्यपूर्ण तरीके से उनके उपदेश का जवाब दिया और कृष्ण के प्रति बिना शर्त प्रेम जताया। इस बातचीत को भ्रमर गीत के नाम से जाना जाता है। इस पूरे प्रकरण का उल्लेख श्रीमद् भागवतम् के 10 वें स्कंध में मिलता है। यहाँ उद्धव जी ने श्री राधा और गोपियों को अपना गुरु माना और उनसे 'प्रेम' प्राप्त कीया।

स्थान: 
उद्धव क्यारी नंदगाँव में नंद महल के पास एवं नारद वन के बिलकुल समीप स्थित है ।