या छवि पै रसखान अब, वारौं कोटि मनोज।
जाकी उपमा कविन नहि, पाई रहे कहुं खोज॥
- श्री रसखान
रसखान कहते हैं कि उस सुंदर मनोहर रूप पर करोड़ों कामदेव भी न्योछावर हैं, जिसकी उपमा और तुलना कवि लोग कहीं भी ढूँढ़ नहीं पाते। श्री राधा-कृष्ण के रूप-सौन्दर्य की तुलना करना असंभव है।
जाकी उपमा कविन नहि, पाई रहे कहुं खोज॥
- श्री रसखान
रसखान कहते हैं कि उस सुंदर मनोहर रूप पर करोड़ों कामदेव भी न्योछावर हैं, जिसकी उपमा और तुलना कवि लोग कहीं भी ढूँढ़ नहीं पाते। श्री राधा-कृष्ण के रूप-सौन्दर्य की तुलना करना असंभव है।

