अब तो कृपा करो ललितादि अली । [1]
तुम बिन और न कोउ साधन सब तैं तिहारी शरण बली । [2]
मोहिं दिखावहु वृंदावन की वे नवनिकुंज गली । [3]
होत हैं नागरिया नागर की जहाँ नित रंगरली ।। [4]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (97)
प्रस्तुत पद में श्री नागरीदास जी श्री राधारानी की सखियों से प्राथना कर रहे हैं: अब तो कृपा कर ही दीजिए ललिता इत्यादि सखियाँ। [1]
मेरा तो एक मात्र साधन केवल आप सब सखियों के संग रहकर, आपकी आज्ञा अनुसार लाड़ली लाल को नित्य रिझाने में ही है। [2]
अब ऐसी कृपा कर मुझे वृंदावन की वह नव निकुंज गली दिखाओ जहां श्री राधा कृष्ण नित्य ही रंगरली (नित्य विहार लीला) करते हैं। [3 & 4]
तुम बिन और न कोउ साधन सब तैं तिहारी शरण बली । [2]
मोहिं दिखावहु वृंदावन की वे नवनिकुंज गली । [3]
होत हैं नागरिया नागर की जहाँ नित रंगरली ।। [4]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, छूटक पद (97)
प्रस्तुत पद में श्री नागरीदास जी श्री राधारानी की सखियों से प्राथना कर रहे हैं: अब तो कृपा कर ही दीजिए ललिता इत्यादि सखियाँ। [1]
मेरा तो एक मात्र साधन केवल आप सब सखियों के संग रहकर, आपकी आज्ञा अनुसार लाड़ली लाल को नित्य रिझाने में ही है। [2]
अब ऐसी कृपा कर मुझे वृंदावन की वह नव निकुंज गली दिखाओ जहां श्री राधा कृष्ण नित्य ही रंगरली (नित्य विहार लीला) करते हैं। [3 & 4]

