हे राधे ये कहा कहौ, धरौ जियै विश्वास।
सखी नहीं दासी करौ, राखौ अपने पास॥
- ब्रज के दोहे
हे राधे! आप पर मेरा अटूट विश्वास है। आपसे मेरी यही विनय है कि चाहे सखी बनाकर रखें अथवा दासी बनाकर—किसी भी प्रकार मुझे अपना निकट-सामीप्य प्रदान करें जिससे मैं सदा आपकी निष्काम सेवा कर सकूँ।
सखी नहीं दासी करौ, राखौ अपने पास॥
- ब्रज के दोहे
हे राधे! आप पर मेरा अटूट विश्वास है। आपसे मेरी यही विनय है कि चाहे सखी बनाकर रखें अथवा दासी बनाकर—किसी भी प्रकार मुझे अपना निकट-सामीप्य प्रदान करें जिससे मैं सदा आपकी निष्काम सेवा कर सकूँ।

